ऐसी थी हमारी बचपन की दीपावली, आपकी कैसी होती थी?

अनुज अखिलेश शुक्ला अरे संभल कर कहीं नसेनी ( लकड़ी की सीढ़ी) गिर ना जाये, अच्छा सुनो उसे कुछ खाने को दे देना, बहुत काम पड़ जाता है, सही से करो भैया देखो उस कोने में रह गया, और हां…